Indian Economy Ki Puri Jankari Hindi Me

भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे मे आपने पढा भी और सुना भी होगा लेकिन आज हम आपको Indian Economy से सम्बन्धित महत्वपूर्ण जानकारियो से आपको रुबरु करवाए की आपकी सामान्य ज्ञान के बहुत महत्वपूर्ण है और अक्सर आपको यह Question Exam मे भी पूछे जाते है। तो आप हमारी इस लेख को ध्यान पूर्वक पढे और अगर आपको इससे सम्बन्धित कुछ भी जानकारी चाहिए तो हमारे Comment Box मे अपने विचार लिखे।

Indian Economy Ki Puri Jankari Hindi Me

Indian Economy Ki Puri Jankari Hindi Me

भारतीय अर्थव्यवस्था

अर्थशास्त्र और अर्थव्यस्था – अर्थशास्त्र मानव की आर्थिक गतिविधियो का अध्धयन करता है । मानव द्वारा सम्पन्न वैसी सारी गतिविधियाँ जिनमे आर्थिक लाभ या हानि का तत्व विद्यमान हो आर्थिक गतिविधियाँ कही जाती है। अर्थव्यस्था एक अधूरा शब्द है अगर इसके पूर्व किसी देश या किसी क्षेत्र विशेष का नाम के जोडा जाए। वास्तव मे जब हम किसी देशो कि क्रियाओ के संदर्भ ंमे परिभाषित करते है तो उसे अर्थव्यस्था कहते है । आर्थिक क्रिया किसी देश के व्यापरिक क्षेत्र घरेलु क्षेत्र तथा सरकार द्वारा दुर्लभ संसाधनो के प्रयोग वस्तुओ तथा सेवाो के उपभोग उत्पादन तथा वितरण से संबधिक है। निजी क्षेत्र और बाजार के सापेक्ष राज्य व सरकार कि भुकिमा के आधार पर अर्थव्यास्था का वर्गीकरण तीन श्रेणियो मे किया जाता है।

1. पूँजीवादी अर्थव्ययवस्था – इस अर्थ व्यवस्था मे क्या उत्पादन करना है कितना उत्पादन करना है और उसे किस कीमत पर बेचना है ये सब बाजार तय करता है इसमे सरकार की कोई आर्थिक भुमिका नही होती है।

Note– 1776 ई0 मे प्रकाशित एड्रस स्मिथ की किताब द वेल्थ आँफ नेशंस को पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का उदगम स्त्रोत माना जाता है।

2. राज्य अर्थव्यवस्था– इस अर्थव्यवस्था की उत्पति पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की लोकप्रियता के विरोध स्वरुप हुआ है इसमे उत्पादन आपूर्ति और कीमत सबका फैसला सरकार द्वारा लिया जाता है ऐसी गैर बाजारी अर्थव्यस्थायो की केद्रीकृत नियोजन अर्थव्यस्था कहते है। जो गैर बाजारी अर्थव्यस्था होती है राज्य ्अर्थव्यवस्था की दो अलग अलग शैली नजर आती है सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था को समाजवादी अर्थव्यवस्था कहते है जबकि 1985 ई0 से पहले चीन की अर्थव्यवस्था को साम्यवादी अर्थव्यवस्था कहते है। समाजबादी अर्थव्यवस्था मे उत्पादन के साधनो पर सामूहिक नियत्रंण की बात शामिल थी और अर्थव्यवस्था को चलाने मे सरकार की बडी भूमिका थी वही साम्यवादी अर्थव्यवस्था मे सभी सम्पतियो पर सरकार का नियंत्रण था और श्रमसंसाधन भी सरकार के ्अधीन थे।

Note- पहली बार राज्य अर्थव्यवस्था सिध्दान्त जर्मन दार्शनिक कार्ल मार्स 1818-1853 ई0 ने दिया था जो एक व्यवस्था के तौर पर पहल बार 1917 ई0 की बोलशेविक क्रातिं के बाद सोवियत सघं मे नजर आई और इसका आदर्श रुप ीन 1949 ई0 मे सामने आया।

3. मिश्रत अर्थव्यवस्था – इसमे कुछ लक्षण राज्य अर्थव्यवस्था के मौजुद होता है तो कुछ लक्षण पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के यह दोनो का मिला जुला रुप है। द्वितीय विश्व युध्द की सम्पति के बाद उपनिवेशवाद के चंगुल से निकले दुनिया के कई देशो ने मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया इनमे भारत, मलेशिया, एव इंडोनेशिया जैसे जेश शामिल है।

Note कोंस ने सुझाव दिया था कि पूँजीवादी अर्थव्यवस्था को समाजवादी अर्थव्यवस्था की ओर कुछ कदम बढाना चाहिए जबकि प्रो0 लांज ने कहा कि समाजवादी अर्थव्यवस्था को पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की ओर कुछ कदम बढाना चाहिेए।

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